बेमौत ज़मींदोज़ हुए लोगों की भटकती आत्माएं ट्वाल के रूप में दिखती हैं

4 years ago

पहाड़ की लोक परम्पराओं, लोक आस्थाओं एवं लोकपर्वों की विशिष्टता के पीछे देवभूमि के परिवेश का प्रभाव तो है ही…

साइकिल, उस्ताद और शिक्षा

4 years ago

अपने जमाने में चलन ऐसा नहीं था कि तीन साल का हो जाने पर बच्चे को तिपहिया साइकिल दिलायी जाए…

पहाड़ों में गर्मियों के दिन और बच्चे

4 years ago

गर्मियों के दिनों में जब हम स्कूल की छुट्टी के बाद घर पहुंचते थे ईजा, बाज्यू, जेठजा सब लोग सिन्तोला…

कहाँ से आई अल्मोड़े की बाल मिठाई

4 years ago

https://www.youtube.com/embed/h4jd64CFtwY अल्मोड़ा और बाल मिठाई तो जैसे एक दूजे के पर्याय हैं. इधर अपने बाल मिठाई कहा उधर अल्मोड़ा ख़ुद-ब-ख़ुद…

नैनीताल में शूट हुई हिट हिन्दी फ़िल्में

4 years ago

https://www.youtube.com/embed/OYwKQNzL6Pw चारों तरफ से बांज, देवदार और चिनार से सजी पहाड़ियों के बीच गहरे हरे रंग की यह झील देश…

शेखर पाठक की नज़र में केदारनाथ का विकास व वर्तमान स्थिति: इंटरव्यू

4 years ago

केदारनाथ के सतत विकास को लेकर किये अपने चार साल के शोध के दौरान मैंने यही पाया कि 2013 की…

छिपलाकोट अन्तर्यात्रा: मुड़ मुड़ के न देख

4 years ago

पिछली कड़ी यहां पढ़ें: छिपलाकोट अंतरकथा : जिंदगानी के सफर में, हम भी तेरे हमसफ़र हैं "दस ग्यारह साल की…

असौज का नाम आते ही पहाड़ में बुतकार लोगों की बाजुएं फड़कने लगती हैं

4 years ago

असौज का नाम आते ही पहाड़ में बुतकार लोगों की बाजुएं फड़कने लगती हैं और कामचोरों की सास मर जाती…

इति : बुकर पुरस्कार विजेता गीतांजलि श्री की कहानी

4 years ago

मौत को लेकर हम आतंकित थे कि जब वह आदमी मरेगा तो यह सारी झंझट होगी कि क्या कहाँ कैसे…

‘भँवर: एक प्रेम कहानी’ में प्रेम के कई रंग दिखते हैं

4 years ago

भँवर एक प्रेम कहानी, हाल ही में प्रकाशित उपन्यास है. उत्तराखण्ड के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक, अनिल रतूड़ीजी, इस कृति के…