लोककथा : धौन पानी का भूत

4 years ago

धौन पानी क्षेत्र के एक गांव में तीन लोग रहते थे — सास, ससुर और बहू. सास और ससुर बहु…

इगास लोकपर्व को राजपत्र में स्थान मिलने के मायने

4 years ago

आज का दिन ऐतिहासिक बन गया है. इक्कीस साल के उत्तराखण्ड में, इसके किसी लोकपर्व को पहली बार राजपत्र में…

गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की कविता: बाल दिवस विशेष

4 years ago

प्रख्यात जनधर्मी कलाकार-कवि के रूप में गिर्दा हमारे दिलों में अमर हैं. बाल दिवस पर सुनिये युवा कलाकार करन जोशी द्वारा…

तिवारीजी का झुनझुना बजाने में मस्त हैं आंदोलनकारी

4 years ago

आज एक बुजुर्ग से मुलाकात हुई तो उनके बाजार में आने का कारण यूं ही बस पूछ बैठा. इस पर…

उत्तराखण्ड की ग्रामीण महिलाओं में सामूहिक मेलजोल और उत्सवधर्मिता

4 years ago

सामान्यतः पहाड़ के गांव की महिलाओं के दैनिक जीवन का स्वरूप अत्यधिक व्यस्त और संघर्षमय  रहता है.  छह ऋतुओं, 12 महीने उनके…

माँ का जादुई बक्सा

4 years ago

हलवाई पांचवीं बार अपना हिसाब करने आया था. (Mother's Magic Box) —'तुम्हारा कितना हुआ भाई' पापा पांचवीं बार उससे पूछ…

पन्त-मटियानी के बेमेल युग्म का मिथक

4 years ago

इस किस्से की प्रामाणिकता का मैं दावा नहीं करता. बाकी लोगों की तरह मैंने भी इसे दूसरों के मुंह से…

वरिष्ठ व्यंग्यकार की आवश्यकता है

4 years ago

“अरी ऐ री आली!” “हाँ, सखी बोल!” “आली…” “सखी तू किंचित सी चिंतित प्रतीत होती है.” “किंचित नहीं आली, अत्यंत.…

ठेठ पहाड़ी खेलों की याद

4 years ago

खेल के मैदान में आजकल भारत के कई खिलाड़ी कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं. पढाई के साथ खेलकूद को भी…

जंगल का राजा शेर क्यों, कभी सोचा?

4 years ago

यह तथ्य निर्विवाद है कि जंगल का राजा शेर होता है. हमने इसे एक तथ्य, एक सत्य इसलिए माना, क्योंकि…