आज बोया जाता है ‘हरेला’

4 years ago

हरेला, उत्तराखंड का एक लोकप्रिय त्यौहार है. उत्तराखंड में हरेला साल में तीन बार मनाया जाने वाला प्रकृति से जुड़ा…

कहानी : धनिया की साड़ी

4 years ago

लड़ाई का ज़माना था, माघ की एक साँझ. ठेलिया की बल्लियों के अगले सिरों को जोडऩे वाली रस्सी से कमर…

गुलजार की कहानी : धुआँ

4 years ago

बात सुलगी तो बहुत धीरे से थी, लेकिन देखते ही देखते पूरे कस्बे में 'धुआँ' भर गया. चौधरी की मौत…

लीला गायतोंडे की कहानी : ओ रे चिरुंगन मेरे

4 years ago

माँ की मौत के दो दिन गुज़रे थे. उसकी याद में मुझे बार-बार रोना आ रहा था. पिता जी दिन-रात…

लच्छू कोठारी के बेवकूफ बेटों का सबसे लोकप्रिय किस्सा

4 years ago

पहाड़ों में लच्छू कोठारी की बेवकूफ संतानों के किस्से खूब कहे जाते हैं. उनकी बेवकूफी के किस्से इस कदर लोकप्रिय…

‘टपकिया’ बिना अधूरा है झोली-भात

4 years ago

आज बात करते हैं भात के साथ का दमदार साथी टपकिया की. टपकिया शब्द टपुक से बना है टपुक दरअसल…

सोमेश्वर घाटी में श्रम का महीना ‘असोज’

4 years ago

सोमेश्वर, कोसी और साईं नदी के बेसिन पर बसा एक उपजाऊ इलाका है. मुख्य फसल धान वाली सोमेश्वर घाटी को…

सेम मुखेम में नागराजा की माया

4 years ago

पहाड़ों में उसके सीमांत से जान -पहचान बढ़ाने के लिए की जाने वाली पद यात्राएं बहुत कुछ दे जातीं हैं.…

मोहब्बत का जो रस्ता है बहुत दुश्वार होता है

4 years ago

शांतिप्रिय तिब्बतियों के मुल्क पर चीन के क्रूर कब्ज़े को चालीस साल बीत चुके थे. एक समय पूर्वी दर्शन के…

ज्ञानरंजन की कहानी ‘छलांग’

4 years ago

श्रीमती ज्वेल जब यहाँ आकर बसीं तो लगा कि मैं, एकबारगी और एकतरफा, उनसे फँस गया हूँ और उन्हें छोड़…