पाइन्स तब हमारे लिए ‘पेनल्टी प्वाइन्ट’ हुआ करता

5 years ago

पर्यटक देशी हो अथवा विदेशी अथवा सूदूर पहाड़ों के गंवई हों, नैनीताल को एक बार देखने की चाहत सभी में…

समळौण्या होती सैकोट के सेरों की रोपाई

5 years ago

गढ़वाल के उन गिने-चुने गाँवों में से एक है सैकोट जिनकी उपजाऊ ज़मीन पहली नज़र में ही मन को भा…

बहुत भरोसेमंद था रमुआ बल्द

5 years ago

बचपन गजब होता है जो बातें उन दिनों अखरती हैं वहीं बाद में मधुरता घोलती दिखाई देती हैं. कुछ बातें…

जाड़ इलाके की नमकीन चहा ‘ज्या’

5 years ago

उच्च हिमालय और सीमांत के इलाके में उत्तरकाशी से आगे गंगोत्री मार्ग में पसरी है भैरोघाटी. भैरो घाटी से ऊपर…

पथरीली राहों का सफर : स्कूल और वह मौत का लठ्ठा पुल

5 years ago

 संस्मरण -2 यूं तो चिल्किया से दशौली, डौणू, भदीणा का कोई सीधा नाता नहीं था. प्राइमरी की पढ़ाई करने ग्राम…

पहाड़ी क्षेत्रों की महिलाओं का प्रसव भगवान भरोसे होता है

5 years ago

मां के गर्भ में शिशु उसका ही अंश होता है और हर मां को अपना शिशु प्यारा होता है. यही…

एक थी शर्मीली

5 years ago

कॉर्बेट की एक ऐसी बाघिन जिसने अपनी असाधारण सुंदरता, अदभुत शारीरिक डील-डौल व शिकार करने के अभूतपूर्व क्षमता से देश…

अब सुनने को नहीं मिलते हैं पहाड़ के मेलों में ‘बैर’

5 years ago

वैरा जिसे बैर भी कहते हैं,  इसका शाब्दिक अर्थ संघर्ष है जो गीत-युद्ध के रूप में गायकों के बीच होता…

भाबर के इलाके वास्तव में पहाड़ियों की ही भूमि है

5 years ago

एक समय ऐसा भी था जब कुमाऊं में भाबर की जमीन पहाड़ियों की हुआ करती थी. पहाड़ में रहने वाले…

चंद्रकुंवर बर्त्वाल की कविता ‘काफल पाक्कू’

5 years ago

हे मेरे प्रदेश के वासीछा जाती वसन्त जाने से जब सर्वत्र उदासीझरते झर-झर कुसुम तभी, धरती बनती विधवा सीगंध-अंध अलि…