कुमाऊनी सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों की त्रिवेणी

6 years ago

आमा के हिस्से का पुरुषार्थ -2 कुमाऊनी में एक मुहावरा बड़ा ही प्रचलित है ‘बुढ़ मर भाग सर’ यानि कि…

शहर की परिधि से दूर अपनी जड़ों को लौटते पहाड़ी प्रवासी

6 years ago

जून का पहला हफ्ता कुछ गर्म थपेड़ों वाला लेकिन मानसून की आश में झूमता हुआ मानसून पूर्व बारिशों में भीग…

रेवती रोई नहीं : एक सशक्त पहाड़ी महिला की कहानी

6 years ago

रानीखेत रोड से होती हुई रेवती लकड़ियों की गढ़ोई (बंडल) लेकर जैसे तंबाकू वाली गली से गुजरी, जमनसिंह की आँखों…

सभी मां-बाप बचपन से बच्चों को ‘सदा सच बोलो’ का पाठ पढ़ाते हैं

6 years ago

4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम – 59 (Column by Gayatree Arya 59)पिछली किस्त का लिंक: एक बच्चा अपनी मां…

गढ़वाल सैन्य परंपरा का प्रारम्भिक महानायक : लाट सूबेदार बलभद्र सिंह नेगी

6 years ago

‘जिस अंचल में बलभद्र सिंह जैसे वीरों का जन्म होता है, उसकी अपनी अलग रेजीमेंट होनी ही चाहिए.’ कमान्डर इन…

आषाढ़ का एक दिन : सोर घाटी से हिमालय

6 years ago

बड़े शहरों के मुकाबले धीरे चलने वाला यह जिला अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण देश के सबसे महत्वपूर्ण जिलों में…

दीपा नौटियाल से टिंचरी माई तक का सफ़र : पुण्यतिथि विशेष

6 years ago

सन् चौहत्तर के आस-पास की बात है. कोटद्वार में कर्मभूमि के संपादक स्व० भैरवदत्त धूलिया के घर में टिंचरी माई…

बाघिन को मारने वाले खकरमुन नाम के बकरे की कुमाऊनी लोककथा

6 years ago

बड़ी पुरानी बात है, जाड़ों के दिन थे. पहाड़ पार जंगल में चरने गयी बकरियों में एक गर्भवती बकरी जंगल…

पहाड़ में रोपणी की अनमोल यादें

6 years ago

एक मित्र ने हाल ही में वाट्सएप पर दो खूबसूरत पंक्तियां भेजी थी - (Memoir by Shurveer Rawat) ‘न प्यार-मोहब्बत…

बिजलि भूमि : जनपक्षीय आंदोलनों को आवाज़ देने वाला नरेन्द्र सिंह नेगी का जनगीत

6 years ago

केदारनाथ आपदा को सात साल हो गए हैं पर घाव अब भी बने हैं. अनियोजित विकास भी इसके प्रमुख कारणों…