हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने: 68

7 years ago

पिछली कड़ी का लिंक: हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने- 67 हल्द्वानी का विस्मृत इतिहास (Forgotten History of Haldwani) सामाजिक…

अपार संभावनाएं हैं कुमाऊं के जोहार घाटी में साहसिक पर्यटन की

7 years ago

उत्तराखण्ड के कुमाऊं के उच्च हिमालयी क्षेत्र में साहसिक पर्यटन की अपार सम्भावनाएं हैं. इनमें मुख्य रूप से पिंडारी, कफनी,…

कुमाऊँ के पशुचारकों का देवता चौमू

7 years ago

चौमू देवता का मूलस्थान चम्पावत जनपद में गुमदेश स्थित चमलदेव में है किन्तु चम्पावत के अतिरिक्त पिथौरागढ़ में वड्डा के…

कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 94

7 years ago

डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है - “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि…

झंगोरा: पहाड़ का पारंपरिक व पौष्टिक अनाज

7 years ago

विभिन्न नामों से जाना जाता है झंगोरा उत्तराखण्ड में झंगोरा (Jhangora) नाम से पहचाने जाने वाले अनाज का वानस्पतिक नाम…

Nainital’s Sherwood before Independence

7 years ago

Read in Hindi Need for a good school was felt after the European settlement in Nainital. This requirement was first…

आजादी से पहले नैनीताल का शेरवुड

7 years ago

Read in English नैनीताल में यूरोपियन बस्ती बसने के बाद एक अच्छे स्कूल की जरुरत महसूस की गयी. इस जरुरत…

कुछ तो था मिनी नायर के वजूद में जिसने मुझे उसे भूलने नहीं दिया है

7 years ago

पहाड़ और मेरा जीवन भाग-17 (पोस्ट को लेखक सुन्दर चंद ठाकुर की आवाज में सुनने के लिये प्लेयर के लोड…

गंगू रमौला की कथा

7 years ago

सुप्रसिद्ध गढ़वाली कवि-इतिहासकार तारादत्त गैरोला ने अंग्रेज ई. शर्मन ओकले के साथ मिलकर कुमाऊँ और पश्चिमी नेपाल की लोककथाओं (Uttarakhand…

कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 93

7 years ago

डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है - “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि…