ट्रेल पास अभियान भाग – 5

7 years ago

पिछली कड़ी पिण्डारी कांठा में चार दिन पांच अक्टूबर के प्रातः ही चाय के पश्चात् चन्दोल, तेवारी, शाहजी और कीर्तिचन्द…

कुमाऊंनी लोकगीतों में सामाजिक चित्रण भाग – 2

7 years ago

पिछली कड़ी विवाहोपरान्त पुत्री की विदाई सर्वत्र करूण होती है. वह मां की दुलारी है, जिसने उसे पालपोस कर बड़ा…

बहुत कम समय भी रहता है देर तक

7 years ago

मन का गद्य -शिवप्रसाद जोशी एक हल्की सी ख़ुशी की आहट थी. लेकिन जल्द ही ये आवाज़ गुम हो गई.…

जैसे कोई कीमती चीज सदा के लिए मिट्टी में मिल गई हो

7 years ago

इक नग़मा है पहलू में बजता हुआ - शंभू राणा करीब पांचेक साल बीत गए सतीश को गुजरे हुए. वह…

ओह कसारदेवी : एक फोटो निबंध

7 years ago

सभी फोटो जयमित्र सिंह बिष्ट के हैं.

आदमी उस तहखाने के नाम से डरता था

7 years ago

भय के कोने भय से निजी कुछ नहीं. कुछ पल हर आदमी के जीवन में लौट लौट कर आते हैं…

आँखों में काला मोतियाबिन्द ठहर गया लेकिन शहर से हवाई जहाज नहीं उड़ा

7 years ago

पिथौरागढ़ नैनीसैनी गाँव की एक आमा है जो एक ज़माने में गांव के लड़कों की काखि ( चाची ) हुआ…

प्रकट सुंदरता के भीतर कितने जलजले – आलोक धन्वा की कविता – 2

7 years ago

(पिछली कड़ी से आगे) अपने भीतर घिरते जाने की कविताः आलोक धन्वा के बारे में -शिवप्रसाद जोशी आलोक धन्वा क्या…

सूरज की मिस्ड काल – 9

7 years ago

उजाले के कमांडो आज सुबह जरा जल्दी जग गये. जल्दी मतलब पांच बजे. इत्ता जल्दी जगने पर समझ नहीं आया…

ट्रेल पास अभियान भाग – 4

7 years ago

पिछली कड़ी 30 सितम्बर के प्रातः एक नेपाली कुली को अल्यूमीनियम की सीढ़ी के शीघ्र बुढ़ियागल के नाले तक पहुंचाने…