मेहनती भालू और चालाक सियार की लोककथा
हिमालय की घनी घाटियों और देवदार के जंगलों के बीच एक शांत इलाका था. वहाँ एक ताक़तवर भालू रहता था. उसका शरीर भारी था, आवाज़ गहरी और दिल सीधा-सादा. उसे जंगल के नियमों पर भरोसा था—जो मेहनत करे,... Read more
बाल, माल व पटालों का शहर : अल्मोड़ा
अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड का प्राचीन एवं महत्वपूर्ण शहर है. मानसखण्ड ग्रन्थ में अल्मोड़ा के भू-भाग को ‘रामक्षेत्र’ कहा गया है. यहां की पहचान ‘राजपुर’, ‘अल्मपुर’, ‘आलमनगर’ नाम से भी रही है. इतिहास... Read more
जो शराब पीता है, परिवार का दुश्मन है.जो शराब बेचता है, समाज का दुश्मन है.जो शराब बिकवाता है, देश का दुश्मन है. चौंकिए मत, उत्तराखण्ड में उक्त नारे आज के नहीं वरन 42 बरस पूर्व के हैं. बात अती... Read more
200 साल पुराने यात्रा-वृतांत में कुमाऊँ के ‘खस’
उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में लिखे गए यात्रा-वृतांत भारत के सामाजिक, प्रशासनिक और भौगोलिक इतिहास को समझने के महत्त्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं. रेजिनाल्ड हेबर द्वारा रचित ‘नैरेट... Read more
तिवारी मॉडल में पहाड़ की उद्योग नीति और पलायन
पिछली कड़ी : जब तक सरकार मानती रहेगी कि ‘पलायन’ विकास की कीमत है, पहाड़ खाली ही होते रहेंगे उत्तराखंड की आर्थिक नीतियों में पलायन को अंतरसंरचना की कमी व शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के... Read more
बहुत पहले की बात है. हिमालय की तलहटी में बसे एक घने जंगल और उसके पास बसे गाँवों में एक बंदर रहता था. उसका नाम था बहादुर पून. नाम के अनुसार वह सचमुच बहादुर तो था, लेकिन उसकी सबसे बड़ी ताक़त उ... Read more
200 साल पहले कैसा था उत्तराखंड
‘ट्रैवल्स इन द हिमालयन प्रोविन्सेज़ ऑफ़ हिंदुस्तान एंड द पंजाब’ उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभिक हिमालयी समाज, भूगोल और राजनीति को समझने का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ है. इसके लेखक विलियम मूरक्... Read more
जब तक सरकार मानती रहेगी कि ‘पलायन’ विकास की कीमत है, पहाड़ खाली ही होते रहेंगे
पिछली कड़ी : उत्तराखंड विकास नीतियों का असमंजस उत्तराखंड में पलायन मात्र रोजगार का ही संकट नहीं रहा, यह तो पिछले दो सौ सालों से हो रही हलचल से उपजीबहुआयामी संरचनात्मक विफलता दिखा... Read more
एक रोटी, तीन मुसाफ़िर : लोभ से सीख तक की लोक कथा
पुराने समय की बात है. हिमालय की तराइयों और पहाड़ी रास्तों से होकर जाने वाले एक लंबे पैदल मार्ग पर तीन मुसाफ़िर सफ़र कर रहे थे. तीनों अलग-अलग जगहों से आए थे, लेकिन मंज़िल कुछ समय के लिए एक ही... Read more
तिब्बत और उससे जुड़े पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों का समाज लंबे समय तक भौगोलिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से बाहरी दुनिया से अलग रहा. इस अलगाव का प्रभाव वहाँ की सामाजिक संरचनाओं पर स्पष्ट... Read more


























