गांव जाता था तो मुझे मां जैसी ही ताई, चाची, दीदी, बुआएं भी लगती थीं. मैं हैरान होता था कि आख़िर ये कौन सी चीज़ है जो इन लोगों को एक दूसरे में विलीन कर रही है. फिर मुझे यह दिखा- दुनिया का उजा... Read more
महिलाओं को वोट मिलने के अधिकार से पहले 1892 में वाशिंगटन की महिलाओं ने अपने राज्य पुष्प के चयन के लिये वोट डाला था. 1893 में होने वाले शिकागो विश्व मेले में लगने वाली फूलों की प्रदर्शनी में... Read more
दुनिया की सबसे प्रभावशाली चीज : कुमाऊनी लोककथा
किसी समय एक राजा हुआ करता था. राजा ने अपनी राजधानी के चारों दरवाजों पर गुप्तचर तैनात किये थे. वहां होने वाली हर बात को गुप्तचर लिखकर रखते और महीने के आखिर में राजा को दे आते. एक बार एक दरवाज... Read more
महिला क्रिकेट विश्व कप में भारत ने अपना पहला मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ़ जीत लिया है. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुये 7 विकेट पर 244 रन बनाये जवाब में पाकिस्तान की पूरी टीम 137 रन बनाकर आउट... Read more
विरासत है ‘खन्तोली गांव’ की समृद्ध होली परम्परा
मुझे पहला मंच मेंरे गांव खन्तोली की होली में मिला. गांव के लोगों के प्रोत्साहन और शाबासी ने ही कुछ लिखने की प्रेरणा दी. मेंरे गुरु वास्तव में मेंरे गांव के लोग हैं, गाँव की होली है. क्या शान... Read more
परदा : यशपाल की कहानी
चौधरी पीरबख़्श के दादा चुंगी के महकमे में दारोग़ा थे. आमदनी अच्छी थी. एक छोटा, पर पक्का मकान भी उन्होंने बनवा लिया. लड़कों को पूरी तालीम दी. दोनों लड़के एंट्रेंस पास कर रेलवे में और डाकख़ाने... Read more
इलाचन्द्र जोशी की कहानी ‘रेल की रात’
गाड़ी आने के समय से बहुत पहले ही महेंद्र स्टेशन पर जा पहुँचा था. गाड़ी के पहुँचने का ठीक समय मालूम न हो, यह बात नहीं कही जा सकती. जिस छोटे शहर में वह आया हुआ था, वहाँ से जल्दी भागने के लिए व... Read more
(नैनीताल से तल्ल्लुक रखने वाली त्रिमाला अधिकारी ने थिएटर से अभिनय की यात्रा शुरू की. ‘हंसा’ बड़े पर्दे पर उनकी पहली फ़िल्म थी. ‘हरामखोर,’ ‘भस्मासुर,’ ‘गार्बेज,’ जैसी फ़िल्मों में काम कर चुकी... Read more
‘गरमपानी का रायता’ भुलाये नहीं भूलता जिसका स्वाद
कुमाऊं के गांव से जुड़े पहाड़ी को भले अपनी उमर ठीक से याद हो या न हो पर उनको गरमपानी का रायता जरुर याद रहता है. पहाड़ों से दशकों पहले बाहर चली गयी बहु बेटियों के मुंह में आज भी गरमपानी के रा... Read more
उत्तराखंड में मिले सिन्धु घाटी सभ्यता के साक्ष्य
दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के तत्वाधान में पुरातत्व व इतिहास के शोधार्थियों द्वारा उत्तरकाशी जनपद के बरनी गाड़ स्थान से लगभग 10 किमी उत्तर पूर्व में स्थित देवल गांव से पाषाण की एक महिष (भ... Read more



























