हिमांशु जोशी की कहानी ‘भगवान नहीं हैं’
भगवान नहीं है पावरोटी ! हां-हां पावरोटी चुराई थी उसने. सुना भाग रहा था. भागेगा नहीं तो क्या चोरी कर के वहीं खड़े रहेगा. कहेगा मुझे गिरफ्तार कर लो. नहीं, मैंने अपनी आँखों से देखा. भागता नहीं... Read more
दुनिया में सबसे पहले धान खेती किसने की इस सवाल के हज़ारों जवाब मिलते हैं. इतिहास, विज्ञान, लोकमान्यताओं का ढेर है जो बताता है कि दुनिया में सबसे पहले किसने धान की खेती की. विज्ञान के पास अपन... Read more
‘उस्ताद अमानत हुसैन’ कुमाऊनी शास्त्रीय होली के जनक
इस बात में कोई दोराय नहीं है कि कुमाऊं क्षेत्र में का आगमन मथुरा के आस-पास के इलाकों से हुआ है. कुमाऊं में गाई जाने वाली होलियों बृज और खड़ीबोली का स्पष्ट प्रभाव देखा जाता है. कुमाऊनी में गा... Read more
‘अभागी पत्नी’ कुमाऊनी लोककथा
एक गांव में एक व्यापारी अपनी दो पत्नियों के साथ रहता था. दोनों पत्नियाँ आपस में खूब झगड़ा करती थी क्योंकि आदमी अपनी दूसरी पत्नी को ज्यादा प्यार करता तो हमेशा उसी का साथ देता. एकबार व्यापारी... Read more
शंखनाद से कम आध्यात्मिक नहीं हिमालयी मवेशियों के गले में बंधी तिब्बती घंटियों के सुर
हिमालयी चरवाहों के मवेशियों के गले में बंधी तिब्बती घंटियाँ और उनकी ध्वनि भी इन चरवाहों के जीवन की तरह ही गतिमान होती है. इन तिब्बती घंटियों की ध्वनि काफी तेज होने के बावजूद कानों को मधुर लग... Read more
अमरीकी टीवी कार्यक्रम गेम ऑफ़ थ्रोंस दुनिया के लोकप्रिय टीवी कार्यक्रमों में शुमार है. जॉर्ज आर मार्टिन की किताब पर आधारित यह टीवी कार्यक्रम भारतीय युवाओं के बीच भी ख़ासा लोकप्रिय रहा है. सि... Read more
गांगी तैयार मझौल आगौ
गंगा गिरी और दीवान सिंह के माता-पिता ने निर्णय लिया कि बच्चों की पढ़ाई के लिए वो पहाड़ छोड़कर तराई-भाबर में ऊधम सिंह नगर जिले के एक छोटे से गाँव मझोला में घर बनाएँगे और बच्चों की आगामी जिंदग... Read more
एक बार भादौ के महीने में गौरी कैलाश से अपने मायके के लिये निकलती हैं और रास्ता भटक जाती हैं. रास्ता भटकने पर वह अलग पेड़ों से अपना मायका पूछती हैं और रास्ता बताने पर उन्हें आशीर्वचन देकर आगे... Read more
कहते हैं शिवरात्रि के बाद कुमाऊं की होली में यौवन का रंग भरने लगता है. शिवरात्रि के दिन से ही करीब दो महीने से चली आ रही बैठकी होली में रंग भी पड़ता है. निर्वाण, श्रृंगार से होती हुई होली अब... Read more
मंत्र : मुंशी प्रेमचंद की कहानी
संध्या का समय था. डॉक्टर चड्ढा गोल्फ़ खेलने के लिए तैयार हो रहे थे. मोटर द्वार के सामने खड़ी थी कि दो कहार एक डोली लिये आते दिखाई दिए. डोली के पीछे एक बूढ़ा लाठी टेकता चला आता था. डोली औषाधा... Read more



























