नशा : मुंशी प्रेमचंद की कहानी
ईश्वरी एक बड़े ज़मींदार का लड़का था और मैं एक ग़रीब क्लर्क का, जिसके पास मेहनत-मजूरी के सिवा और कोई जायदाद न थी. हम दोनों में परस्पर बहसें होती रहती थीं. मैं ज़मींदारी की बुराई करता, उन्हें... Read more
हल्द्वानी के सिनेमाघरों का इतिहास
नगर से महानगर हो चुके हल्द्वानी ने अपने आसपास के गांवों को भी अपने में सम्मिलित कर लिया है. मुखानी क्षेत्र में पर्वतीय रामलीला कुछ दिनों तक आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी जो अब बंद हो चुकी है.... Read more
दलितों की बारात पहाड़ में पहले बिना डोला-पालकी की चलती थी और दूर से ही पहचानी जाती थी. किन्तु टिहरी-गढ़वाल जिले की ग्यारह गाँव पट्टी में ढुंग गाँव के दीपचन्द शाह ने अपनी शादी में डोला-पालकी... Read more
नया क़ानून: सआदत हसन मंटो की कहानी
मंगू कोचवान अपने अड्डे में बहुत अक़लमंद आदमी समझा जाता था. गो उस की तालीमी हैसियत सिफ़र के बराबर थी और उस ने कभी स्कूल का मुंह भी नहीं देखा था लेकिन इस के बावजूद उसे दुनियाभर की चीज़ों का इल... Read more
कोविड काल में उत्तराखण्ड ने जाति उत्पीड़न के मसलों के लिए भी देशव्यापी चर्चा बटोरी. कोविड की पहली लहर के दौरान नैनीताल के ओखलकांडा के एक क्वारंटाइन सेंटर में सवर्णों द्वारा दलित भोजन माता का... Read more
संभावना वर्सेस अपार संभावना
आपने ग़ौर किया होगा मुल्क में समय-समय पर कुछ चीज़ों की संभावना और किन्ही अन्य की अपार संभावना जताई जाती है. आइए हम भी संभावना और अपार संभावना के बीच अंतर को समझने का प्रयास करें. ऐंवैं ही…(A... Read more
डरपोक बाघ और चालाक सियार की कहानी
बड़ी पुरानी बात है जंगल के राजा बाघ और हाथी के बीच भयंकर लड़ाई हो गयी. 22 दिन 22 रात चली इस लड़ाई में बाघ मारा गया. बाघ के मारे जाने के बाद जंगल में कोई राजा न हुआ. बाघ की पत्नी अपने छोटे बच... Read more
नास्तिक : कुमाऊनी लोककथा
एक व्यक्ति ने एक सन्यासी से तीन सवाल पूछे. (kumaoni folklore Ivan Minayev) पहला सवाल था — आप ऐसा क्यों कहते हैं कि परमात्मा सर्वत्र व्याप्त है. मुझे तो वह दिखाई नहीं देता है. मुझे दिखाओ कि प... Read more
आज ही के दिन बना था ‘जिला पिथौरागढ़’
सालों पहले आज ही का दिन था जब देश और प्रदेश के नक्शे में पहली बार जिला पिथौरागढ़ का नाम दर्ज हुआ. 24 फरवरी 1960 से पहले पिथौरागढ़ जिला अल्मोड़ा की एक तहसील के रूप में एक मौजूद था. ऐतिहासिक द... Read more
कोट फट गया : नैनीताल का क़िस्सा
– अनिरुद्ध कुमार आठ बज रहे थे और नैनीताल की सर्दियों की रात शहर पर उतर चुकी थी. आप जानते ही हैं कि पहाड़ों की सर्दियों में हाल कैसा होता है. हर इंसान या तो रजाई में घुस चुका था या रजाई... Read more



























