हम कुछ ऐसी गलतफहमियों का शिकार हैं कि उनके चलते हर कदम पर गलतियां दोहराते जाते हैं और हैरान होते हैं कि इतनी मेहनत के बावजूद हमारा जीवन पटरी पर क्यों नहीं आ रहा. भारतीय जनता की सोच में आध्या... Read more
संत राम और आनंदी देवी की जोड़ी में उत्तराखण्ड का लोक संगीत बसता है कहना बिलकुल गलत नहीं होगा. इस सुरीले दंपत्ति का ताल्लुक उत्तराखण्ड के शिल्पकार समाज की उस उपजाति से है गीत-संगीत जिनकी धमनि... Read more
हमारा समाज विविधताओं से भरा है, उतनी ही अनोखी हैं, हर क्षेत्र की लोकसंस्कृति व लोकपरम्पराऐं. कमोवेश प्रत्येक लोकजीवन की अपनी-अपनी विशिष्टताऐं होती हैं,लेकिन जब पहाड़ के लोकजीवन की बात आती है... Read more
‘मेरा भी कोई होता’ एक सीधी-सादी पहाड़न की कहानी
आग जलाने के लिए चूल्हे में फूंक मार-मारकर सुशीला की आंखें लाल हो गई थीं. कमरा धुएं से भर गया था. धुएं से उसकी आंखें चूने लगी थीं. सुशीला ने खीझ के कारण जोर से फूंक मारी, आग ‘धप्प’ से जल उठी.... Read more
मुझे पतंग उड़ाना सीख लेना चाहिए था
बहुत दूर तक नहीं जाती थी पतंग मेरीपश्चिम को बहती हवा अगरदो कलाइयां मारकर गिर जातीशिशू के आंगन, अनाथालय की छत या ज़्यादा से ज़्यादा डक्टराइन आंटी के अहाते मेंहवा पूरब को होतीतो शोभा चाचा की छ... Read more
कहानी : याद
सूरज धीरे-धीरे पहाड़ी के सिर पर से अपना आँचल समेट कर पल भर को ठिठका. गहरे नीले और काले आँचल में शाम को लहरा कर आता देख मुस्कुराया और उसके लिए रास्ता बनाता धीरे से दूसरी ओर सरक गया. (Yaad sto... Read more
एक जीवी, एक रत्नी, एक सपना : अमृता प्रीतम
पालक एक आने गठ्ठी, टमाटर छह आने रत्तल और हरी मिर्चें एक आने की ढेरी “पता नहीं तरकारी बेचनेवाली स्त्री का मुख कैसा था कि मुझे लगा पालक के पत्तों की सारी कोमलता, टमाटरों का सारा रंग और ह... Read more
बुल्ली बाई मामले में गिरफ्तार किए गए तीन युवाओं में से दो का प्रत्यक्ष सम्बन्ध उत्तराखंड से निकला है. पौड़ी जिले के कोटद्वार कस्बे के रहने वाले और फिलहाल जम्मू में तैनात फ़ौज के एक सूबेदार क... Read more
धसपड़ का झूला और नई ज़िन्दगी
अल्मोड़ा जिले का धसपड़ गांव हाल में राष्ट्रीय सुर्ख़ियों का हिस्सा बना था. धौलछीना ब्लॉक में स्थित धसपड़ गांव को जल संरक्षण व संवर्धन पर बेहरीन कार्य करने हेतु श्रेष्ठ ग्राम पंचायत का प्रथम पुर... Read more
उत्तराखंड के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन है आज
देश की आजादी के पांच महीने बाद, जनता के शासन की मांग करना और इस मांग के लिए शहादत होना, सुनने में कुछ अजीब सा लगता है. लेकिन उत्तराखंड की तत्कालीन टिहरी रियासत में 11 जनवरी 1948 को दो नौजवान... Read more



























