तिब्बत का पहला भौगोलिक अन्वेषण करने वाले उन्नीसवीं शताब्दी के महानतम अन्वेषकों में से एक माने जाने वाले मुनस्यारी की जोहार घाटी के मिलम गाँव के निवासी पंडित नैनसिंह रावत के बारे में लेख काफल... Read more
‘जिस मकान पर आपके बेटे ने ही सही, बडे़ फख्र से ‘बंसीधर पाठक ‘जिज्ञासु’ की तख़्ती टांग दी थी, उसमें देवकी पर्वतीया का खून-पसीना लगा है. यह नाम कभी आपने ही उन्हें दिया था लेकिन नेम प्लेट पर अप... Read more
2/1 गोरखा राइफल्स के हवलदार दिलीप सिंह के घर 15 अगस्त 1914 को हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले के मुख्यालय धर्मशाला में स्थित सल्ला धारी गांव, जिसे पेंशनर लाइन भी कहा जाता था, में उस सपूत ने जन... Read more
दर्दभरी खूबसूरत कहानी ‘सरदार उधम सिंह’
माइकल ओडॉयर को गोली मारने के बाद उधम सिंह को ब्रिटिश जेल में जिस तरह की यातनाएँ दी गई उसके बारे में सोचकर भी किसी की रूह काँप जाए लेकिन उधम सिंह मानो मौत का कफन बाँधकर ही ओडॉयर को मारने ब्रि... Read more
चालाक खरगोश ने हाथियों के झुंड को भगा दिया
एक वन में हाथियों का एक झुंड रहता था. झुंड के सरदार को गजराज कहते थे. वो विशालकाय, लम्बी सूंड तथा लम्बे मोटे दाँतों वाला था. खंभे के समान उसके मोटे मोटे पैर थे. जब वो चिंघाड़ता था तो सारा वन... Read more
‘वेश्या की लड़की’ सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी
छाया, प्रमोद की सहपाठिनी थी. प्रमोद, नगर के एक प्रतिष्ठित और कुलीन ब्राह्मण परिवार का लड़का था. और छाया? छाया थी नगर की एक प्रसिद्ध नर्तकी की इकलौती बेटी. नगर में एक बहुत बड़ा राधाकृष्ण का म... Read more
मुक्तेश्वर : मलबे से पांच मजदूरे के शव निकाले गए
दो दिनों से जारी बारिश के बीच अब तक की सबसे बुरी और दिल देहला देने वाली खबर नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर से है. आज प्रशासन को प्रातः 6.20 पर सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम चौखुटा तोक दोसापानी, निक... Read more
दो दिन की बरसात नहीं झेल पाया गौला पुल: वीडियो
उत्तराखंड में हो रही अतिवृष्टि के कारण हल्दानी में गौला नदी पर बने पुल एक तरफ का हिस्सा भरभरा का कर टूट गया. मौके पर मौजूद बनभूलपुरा पुलिस के अनुसार मंगलवार तड़के पुल के समीप जवान ड्यूटी पर... Read more
उत्तराखण्ड की लोककथा : ब्रह्मकमल
बहुत समय पहले की बात है. कहते हैं कि उस समय परी लोक की परियाँ धरती पर आती थीं. यहाँ दिनभर विचरण करती थीं और रात का अँधेरा होने के पहले वापस चली जाती थीं. परियों को धरती की स्वच्छ-साफ पानी की... Read more
बिच्छू घास की पत्तियों को 5000 से 9000 रुपये तक की रकम चुकाकर क्यों खरीदते हैं लोग
पहाड़ों में सिन्ना या बिच्छू घास हिकारत की नजर से ही देखा गया या उससे डरकर दूरी ही बनाई गयी. बीसवीं सदी में पहाड़ी क्षेत्रों में जन्में कम ही ऐसे लोग होंगे जिनको रूह कपा देने वाले बिच्छू घास... Read more



























