मशकबीन के बिना जैसे उत्तराखण्ड के लोकसंगीत की कल्पना तक करना मुश्किल है. मशक्बाजा या मशकबीन के सुर और पहाड़ की वादियां एक दूसरे को पूर्णता प्रदान करते हुए लगते हैं. मशकबीन की धुन सुनते ही जो... Read more
कहानी : प्लेग की चुड़ैल
प्लेग महामारी के समय की व्यथा कहती मास्टर भगवान दास की यह कहानी 1902 में ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी. (Master Bhagwan Das Plague Ki Chudail) गत वर्ष जब प्रयाग में प्लेग... Read more
‘जोहान वी हल्टिन’ द वायरस हंटर
अलास्का में आर्कटिका से बस 75 मील दूर अवस्थित एक छोटे से तटीय गांव ‘ब्रेविग मिशन’ में जून 1951 में एक अजीब दृश्य देखा गया. आयोवा से आए एक आगंतुक ने वहां के कब्रिस्तान में पहले छोटे-छोटे फायर... Read more
चिपको एवं गांधीवादी विचारों की प्रयोगशाला के रूप में अपनी अन्तराष्ट्रीय पहचान बनाने वाले स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा के एक सक्रिय राजनीतिज्ञ से समर्पित गांधीवादी चिंतक और कर्म योगी बनने की कहा... Read more
गंगा के अविरल प्रवाह के लिए संघर्षरत ऋषि ने उसी के दक्षिणी तट पर प्राणों की पूर्णाहुति के साथ अपने जीवन को विराम दिया. 95 वर्षीय पर्यावरण संत, सुंदर लाल बहुगुणा 8 मई 2021 को एम्स ऋषिकेश में... Read more
पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा का निधन
पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा का निधन हो गया. ऋषिकेश एम्स के कोविड आईसीयू वार्ड में भर्ती सुन्दरलाल बहुगुणा के फेफड़ों में संक्रमण पाया गया था. पिछले कुछ दिनों से उनका इलाज ऋषिकेश ईएमएस में... Read more
कुमाऊं के रणबांकुरों की विरासत है छोलिया नृत्य
कुमाऊं की बेजोड़ सांस्कृतिक परम्पराओं व लोककलाओं का अपना समृद्ध इतिहास रहा है. इन लोकपरम्पराओं की जड़ें हमें अपने इतिहास तथा पुरातन समाज की गौरवपूर्ण गाथाओं से भी जोड़ती हैं. कुमाऊं का प्रति... Read more
वनवास, अज्ञातवास और एकांतवास इन तीनों में बहुत समानता है. एक प्रकार से तीनों किसी को हराने के लिए अपने युग की ऊर्जा संचय अवधि हैं. तीनों को पूरा करने के बाद इंसान ‘विजेता’ कहलाता है. तीनों म... Read more
कविता का सच अलग होता है और जीवन का सच अलग होता है
कहते हैं एक ज़माने में भारत में घी दूध की नदियां बहती थीं. इस काव्यात्मक ट्रुथ में यह कहने का प्रयास किया गया है कि जब तक भारत से लूट खसोट नहीं शुरू हुई थी भारत में किसी चीज की कोई कमी नहीं... Read more
शेखर जोशी की कहानी ‘गलता लोहा’
मोहन के पैर अनायास ही शिल्पकार टोले की ओर मुड़ गए. उसके मन के किसी कोने में शायद धनराम लोहार के आफर की वह अनुगूँज शेष थी जिसे वह पिछले तीन-चार दिनों से दुकान की ओर जाते हुए दूर से सुनता रहा... Read more


























