क्या चौड़ी सड़कें हिमालय के लिए बेहतर हैं?
हिमालय में रहना कभी आसान नहीं रहा, लेकिन यह भी सच है कि यहाँ रहने वाले लोगों ने कभी इसे आसान बनाने की ज़िद नहीं की. उन्होंने पहाड़ को बदलने की बजाय खुद को उसके अनुसार ढाला. शायद इसी कार... Read more
क्या आप जानते हैं कि मानसरोवर झील का उल्लेख हमारे प्राचीन ग्रंथों में कितनी बार और किन-किन संदर्भों में आता है? क्या यह केवल एक भौगोलिक झील है, या भारतीय परंपरा में इसका अर्थ कुछ और भी है? औ... Read more
इन्सानों के नाम भले मता-पिता अपनी मर्जी के अनुसार कुछ भी रख लें, यह आप पर निर्भर है. यहां तक कि कभी-कभी उन नामों का कोई सार्थक शब्द तक नहीं बनता. लेकिन जगहों के नाम व्यक्ति विशेष द्वारा नहीं... Read more
‘…कैंजा (मौसी) ने हमारे कीचड़-मिट्टी से सने कपड़े एक टब में भिगोकर छिपला की मिट्टी का पवित्र घोल बना लिया है और उसे लोटे से गोमूत्र की भांति खेतों में लहलहाती फसल में उलीच रही है... Read more
उत्तराखंड विकास नीतियों का असमंजस
पिछली कड़ी यहां पढ़ें : उत्तराखंड में सेवा क्षेत्र का विकास व रणनीतियाँ उत्तराखंड की स्थापना वर्ष 2000 में हुई, जहाँ राज्य के आर्थिक विकास हेतु किये जाने वाले प्रयासों में तदर्थ नीतियों का स... Read more
उत्तराखंड के देहरादून ज़िले में यमुना और टोंस नदियों के संगम के समीप स्थित कालसी वह स्थान है जहाँ भारत के प्राचीन इतिहास की सबसे संवेदनशील आवाज़ पत्थर पर अंकित है. इस चट्टान पर उत्कीर्ण सम्र... Read more
हिमालय केवल भौगोलिक संरचना नहीं है, बल्कि यह जैव-विविधता और पारंपरिक ज्ञान की एक समृद्ध प्रणाली का प्रतिनिधित्व करता है. इस क्षेत्र में पाई जाने वाली औषधीय वनस्पतियाँ सदियों से स्थानीय समुदा... Read more
उत्तराखंड में सेवा क्षेत्र का विकास व रणनीतियाँ
उत्तराखंड की भौगोलिक, सांस्कृतिक व पर्यावरणीय विशेषताएं इसे पारम्परिक व आधुनिक दोनों प्रकार की सेवाओं के लिए अत्यंत संभावनाशील राज्य बनाती हैं. यहां धार्मिक, आध्यात्मिक, प्राकृतिक व रोमांचका... Read more
अल्मोड़ा गजेटियर किताब के अनुसार, कुमाऊँ के एक नये राजा के शासनारंभ के समय सबसे पहला कार्य बालेश्वर में महादेव की उपासना को पुनः स्थापित करना था. लेकिन स्थितियाँ जल्द ही बदल गईं. राजा के गद्द... Read more
कैसे बसी पाटलिपुत्र नगरी
हमारी वेबसाइट पर हम कथासरित्सागर की कहानियाँ साझा कर रहे हैं. इससे पहले आप “पुष्पदन्त और माल्यवान को मिला श्राप” और “पुष्पदंत बने वररुचि और सीखे वेद” कहानियाँ पढ़ चुक... Read more


























