करीब सवा सौ साल पूर्व अपने मूल स्थान जिला सीकर राजस्थान के ग्राम कांवट निकट नीम का थाना से रानीखेत पहुंचे रामनिवास जी के तीन पुत्र –सूरजमल, ब्रदीप्रसाद, जगदीश प्रसाद अग्रवाल हुए. इस पर... Read more
जीवन यूं ही गुजर रहा था तुम्हारे बिना, तुम्हारी दूसरी बार छुट्टी आने की आस में. चिट्ठी का इंतजार रहता था. नजर रहती, पोस्ट ऑफिस से घर तक आने वाली उस संकरी, घुमावदार और चढ़ाई वाली पगडण्डी पर.... Read more
एक पहाड़ी बच्चे के पहली बार बाराती बनने का किस्सा
बचपन में हम लोग गांव के अलावा और कहीं शायद ही कभी जाते. हमारी दुनिया गांव तक सिमटी हुई थी. वहीं गांव, घर, खेत खलिहान और लोग. इसके बाहर हम नहीं जानते थे. पांच साल की उम्र तक मैं अपने गांव और... Read more
एक बार यूं हुआ कि टेस्ट खेलते हुए इंडिया की टीम एक ही दिन में दो बार ऑल आउट हो गयी. एक पारी में 58 रन बने एक में 82. क्रिकेट के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था. उसके अगले महीने ऐसा भी लम... Read more
आज से शुरु होगी कुमाऊं में बैठकी होली
यह भी सुनने में अजीब है कि आज से शाम से कुमाऊं में बैठकी होली शुरु हो जायेगी. अभी जब होली को करीब करीब तीन महीने बाक़ी हैं हमारे कुमाऊं में पूस के पहले रविवार से ही बैठकी होली शुरु हो जानी ह... Read more
स्वामी विवेकानंद को भारतीय इतिहास में ऐसे दिव्य व्यक्तित्व के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने देश के युवाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित किया. हालांकि उनसे प्रभावित होने वालों और उन्हें आदर्श मान... Read more
काफी समय बाद बस से यात्रा की. यात्रा देहरादून से रानीखेत की थी. मैदान से पहाड़ों की बसों में बजाए जाने वाले गीत कुछ इस प्रकार होते हैं— उदाहरण के तौर पर देहरादून से हरिद्वार तक देशी छैल... Read more
सोशियल मीडिया के टोपी और नथुली चैलेंज के बीच पहाड़ में 23 साल की राखी जिन्दगी का चैलेंज हार गयी
यह तस्वीर 23 साल की राखी की है. टिहरी जिले की नैलचामी पट्टी के ठेला गांव की राखी. पिछले दिनों जब उत्तराखंड के लोग सोशियल मिडिया पर टोपी और नथुली चैलेन्ज खेल रहे थे उसी दौरान रुद्रप्रयाग की य... Read more
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की राजनीतिक सूझ-बुझ के कायल उनके विरोधी भी रहते हैं. कभी ककड़ी तो कभी काफल पार्टी का आयोजन कर वह बखूबी जानते हैं कि सुर्ख़ियों में कैसे रहा जाता है. इन दिनों पूर्व... Read more
हल्द्वानी नगर का इतिहास
उत्तराखण्ड के कुमाऊं मण्डल का प्रवेश द्वार हल्द्वानी तब तक एक गांव ही था जब तक इसे व्यापारिक मंडी के रूप में बसाने की शुरुआत नहीं हुई थी. चंद शासनकाल में इसे गांव का ही दर्जा हासिल था. तब इस... Read more


























