भारती कैंजा और पेड़ के साथ उनकी शादी
भारती कैंजा अपने भाई-बहिनों में सबसे छोटी है, लेकिन जीवट में सबसे बड़ी. वह कभी किसी से फालतू नहीं बोलती. जब वह आठ साल की रही होगी, अपनी बुआ के घर ढकाली गई हुई थी. (Memoir by Govind Singh) वहा... Read more
न्यूयार्क से आई महिषासुर मर्दिनी की मूर्ति कहीं बैजनाथ से तो चोरी नहीं हुई थी
न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मेट्रोपॉलटिन म्यूजियम ऑफ आर्ट (एमईटी) ने महिषासुर मर्दिनी की बहुमूल्य मूर्ति भारत को लौटा दी है. एमईटी अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डेनियल विस ने मूर्ति... Read more
हर साल फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार घोषित होता है. हर साल कलेजे पर लम्बे समय से चस्पां पुराना नासूर दुखने लगता है. विज्ञान और ख़ास तौर पर फिजिक्स को लेकर मेरे मन में बचपन से ही बड़ा उत्साह था ल... Read more
फेसबुक पर एक पोस्ट वायरल हो रही है जिसपर मुनस्यारी पुलिस पर गुंडागर्दी के आरोप लग रहे हैं. पोस्ट में लिखा गया है कि पुलिस वाले ने विक्रम नाम के एक युवा विक्रम को केवल इसलिये पीट दिया क्योंकि... Read more
रिंगाल उत्तराखण्ड की बहुउपयोगी वनस्पति
बौना बांस (dwarf bamboo) के नाम से जाना जाने वाला रिंगाल उत्तराखण्ड का बहुउपयोगी पौधा है. रिंगाल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के अलावा भूस्खलन को रोकने में भी सहायक है. (Ringal Multifunctional... Read more
बहुत कम लोग होते हैं जो जीवन भर अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं. खास तौर से तब,जब कोई फर्श से अर्श तक का सफर तय कर लेता है और नाम शोहरत दोनों कमा लेता है. ऐसा ही एक नाम है रेसलिंग की दुनिया में... Read more
हमारी सरकार बैठी रही, दिल्ली में बन गयी कुमाऊनी, गढ़वाली और जौनसारी भाषा अकैडेमी
कल यानी बुधवार को दिल्ली सरकार ने उत्तराखंड की कुमाऊनी, गढ़वाली और जौनसारी भाषाओं के प्रचार-प्रसार के लिए एक अकादमी की स्थापना की है. दिल्ली सरकार ने लोकप्रिय गायक व कलाकार हीरा सिंह राणा को... Read more
बूबू की धुपैणी में महकती अनोखी जड़ – सम्यो
तीन बाखली के छोटे से गाँव में मालगों (ऊपर का गाँव) के बीचों-बीच हमारे एक बूबू रहते थे. बहुत मीठे स्वभाव और बाल सुलभ मुस्कान के धनी थे. बच्चों और बकरी के पट्ठों से बहुत प्यार करते थे इसलिए हम... Read more
निर्धनता पर नोबल पुरस्कार
दुनिया में गरीबी है. सत्तर करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें पेट भर भोजन आज भी नहीं मिलता. कंगाली उनका पीछा करती है. बदहाली उन्हें जीने नहीं देती. भूख उनकी सांसों में है, बीमारी तन में. मुफलिसी तंग... Read more
पिथौरागढ़ में पहली बस 1951 में आई थी
पिथौरागढ़ में पहली गाड़ी के विषय में कई किस्से कहानियां लोकप्रिय हैं. अधिकांश लोगों का मानना है कि यहां आने वाली पहली बस के.एम.ओ.यू. की बस थी, कुछ लोगों का कहना है कि बस नहीं पहली बार पिथौरागढ़... Read more


























