क्योंकि ऐसा बस नफ़रत ही कर सकती है
नफ़रत –विस्वावा शिम्बोर्स्का देखो कितनी सक्षम है यह अब भीबनाए हुए अपने आप को चाक-चौबन्द –हमारी शताब्दी की नफ़रत. किस आसानी से कूद जाती है यहसबसे ऊंची बाधाओं के परे.किस तेज़ी से दब... Read more
आनंद से भरे जीवन के लिए कुछ शर्तिया नुस्खे
क्या आप अपने जीवन को जांच-परखकर बता सकते हैं कि वह खुशहाल है या नहीं. जाहिर है ऐसा करने के लिए आपको कुछ मानक बनाने होंगे अन्यथा आपके लिए यह तय कर पाना बहुत मुश्किल है कि आप असल में एक खुश जी... Read more
2 सितम्बर 1994 उत्तराखंड आन्दोलन के इतिहास की एक और हत्यारी तारीख है. इसी दिन मसूरी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आन्दोलनकारियों पर पुलिस और पी.ए.सी. द्वारा गोली चलाई गयी और 6 आन्दोलनकारी,ज... Read more
फिर लौटी लूणी की मिठास
यह तीसरा अवसर है लूणी में पानी के प्रवाह का. इससे पूर्व 2017 में अरावली क्षेत्र में हुई भारी बारिश से बाढ़ के हालात बने थे. सालों से सूखी पड़ी लूणी नदी में पानी के बहाव को देखने हज... Read more
उत्तराखण्ड के स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन के सूत्रपात में प्रमुखतया महात्मा गांधी की भूमिका मानी जाती है. राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के कार्यक्रमों व अधिवेशनों में उत्तराखण्ड के व्यक्तियों की... Read more
रुद्रनाथ डोली यात्रा का एक रोचक अनुभव
कुछ साल पहले रुद्रनाथ की यात्रा करके लौटे कुछ मित्रों ने वहां खींचे छायाचित्र दिखाये थे. बांज, बुरांस इत्यादि के घने जंगलों, वृक्ष-रेखा से ऊपर रंगबिरंगे पुष्पों से सज्जित मखमली घास के बुग्या... Read more
2 सितम्बर मसूरी गोलीकाण्ड के शहीद
उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के आन्दोलन में मसूरी का ख़ास योगदान रहा है. इस आन्दोलन में मसूरी निवासियों के बलिदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता. 1 सितम्बर को 1994 को खटीमा में हुए बर्बर गोलीकांड... Read more
जन-जन के भगत दा होने के मायने
चाहे आम हो या ख़ास छोटा हो या बड़ा आज से ही नहीं बल्कि उनके कालेज के युवा दिनों से लोग उन्हें प्यार से भगत दा बुलाते हैं. उत्तराखंड में जनसंघ और भाजपा को खड़ा करने वाले भगत सिंह कोश्यारी चाह... Read more
गांधी का ग्रामस्वराज और आधुनिक ग्राम
पंचायतें इन दिनों उत्तराखंड में ग्राम पंचायत चुनाव की चर्चा जोरों पर है. ऐसे में ग्रामीण भारत के विषय में महात्मा गांधी के देखे स्वप्न और उसकी जमीनी हकीकत पर चर्चा करना प्रासंगिक होगा. महात्... Read more
1950 में जीवनयापन के लिए खार मुंबई में टैक्सी चला परमानन्द जोशी दरसानी गरुड़ से प्रवास कर गए. उनके बेटे डी. के. जोशी ने ट्यूशन आदि कई धंधे कर 1990 में अल्मोड़ा महाविद्यालय में 1990 में... Read more


























