अल्मोड़ा के नंदा देवी मंदिर में ताला लगा
कुमाऊं-गढ़वाल में नंदादेवी को कुलदेवी का दर्जा हासिल है. इस हिमालयी देवी के सबसे पुराने मंदिरों में अल्मोड़ा के ऐतिहासिक नंदादेवी मंदिर का नाम सबसे ऊपर आता है. (Nandadevi Temple Almora Dispute... Read more
इनसे बनती है 5 ट्रिलियन इकॉनमी बाबूजी!
इधर 5 ट्रिलियन इकॉनमी की बड़ी चर्चा है. हमारे वरिष्ठ सहयोगी और अर्थशास्त्री, फोटोग्राफर प्रोफ़ेसर मृगेश पाण्डे ने इस वक्तव्य को ध्यान में रखते हुए एक शानदार फोटो निबंध तैयार किया है. साथ ही उन... Read more
देख तो दिल कि जाँ से उठता है…
गोर किस दिलजले की है… देख तो दिल कि जाँ से उठता है… चट्टे परेशान थे. नाराज़ थे. ‘हद्द है. कोई इज्जत नहीं अपनी. अब तो…’ उन्होंने छलांग लगा दी. थैले से बाहर. थैले... Read more
डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के परिचय की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वर्तमान में भारत के मानव संसाधन विकास मंत्री हैं सामान्य शब्दों में कहें तो भारत में वर्तमान शिक्षा मंत्री हैं. निशंक उत्तराखंड स... Read more
नैनीताल की सात पहाड़ियां
नैनीताल की झील सात पहाड़ियों से घिरी हुई है. इन पहाड़ियों के नाम हैं: (Seven Hills of Nainital) अयारपाटा (समुद्र सतह से ऊंचाई: 7689 फीट) देवपाटा (समुद्र सतह से ऊंचाई: 7989 फीट) हांडी बांडी (... Read more
आज अमृता प्रीतम का जन्मदिन है. 31 अगस्त, 1919 को पंजाब के गुजरांवाला अमृता प्रीतम का जन्म हुआ. पंजाबी की ख्यात लेखिका होने के बावजूद वे सारे हिन्दुस्तान की लेखिका मानी जाती हैं. उन्होंने अपन... Read more
उसके चारों ओर एक शून्य विस्तार पाता जा रहा है
कहानी की कहानी-5 आज जब करीब पचपन वर्ष बाद ‘कहानी’ कथा-पत्रिका में देवेन नाम से छपी अपनी इस कहानी ‘अलगाव’ का पुनर्पाठ कर रहा हूं तो याद कर रहा हूं कि आखिर आदमी के अकेलेपन की यह कहानी मेरे मन... Read more
भगतसिंह ! इस बार न लेना काया भारतवासी की
30 अगस्त 1923 को जन्मे मशहूर गीतकार शैलेन्द्र का असल नाम शंकरदास केसरीलाल शैलेन्द्र था. (Remembering Lyricist Shankar Shailendra) 1947 में भारतीय रेलवे की माटुंगा, मुम्बई वर्कशॉप में एक एप्र... Read more
बालकृष्ण : विषाक्त मिठाई का रहस्य बरकरार
देश में आयुर्वेद और योग की सबसे बड़ी कम्पनी पतंजलि योग पीठ के महामन्त्री बालकृष्ण की बीमारी का रहस्य एक हफ्ते बाद भी बरकरार है. रहस्य इस मामले में कि उनके बीमार होने को विषाक्त मिठाई खाने से... Read more
शैलेश मटियानी लिख चुके थे अपने पागलपन का रोजनामचा
शैलेश मटियानी को हममें से कितने लोग जानते हैं? सौ, दो सौ, चार सौ या हजार-दो हजार. यही न? कुछ ने सिर्फ नाम सुना होगा या एकाध कहानी पढ़ी होगी. आज से तीस-पैंतीस साल या थोड़ा और पहले पढ़ाई-लिखाई... Read more



























