बलि का बकरा – देवेन मेवाड़ी की कहानी
कहानी की कहानी उर्फ़ बकरा बलि का ईजा (मां) बीमार थी. उसका बहुत मन था कि देबी खूब पढ़े हालांकि वह कभी स्कूल नहीं गई थी. उसने प्रकृति की किताब पढ़ी थी और मुझे अपनी भाषा में पेड़-पौधों और प्राणि... Read more
पन्द्रह अगस्त - वीरेन डंगवाल सुबह नींद खुलती तो कलेजा मुंह के भीतर फड़क रहा होता ख़ुशी के मारे स्कूल भागता झंडा खुलता ठीक ७:४५ पर, फूल झड़ते जन-गण-मन भर सीना तना रहता कबूतर की मानिन्द बड़े ल... Read more
कल रात आज़ादी सपने में आई थी. उदास, गुमसुम सी सिरहाने पर बैठी किसी सोच में डूबी हुई. तफ्तीश की तो पता चला कि आजादी, आजाद भारत में गुलामी देखकर दुखी है. पहले तो बात ही समझ नहीं आई कि आजाद भार... Read more
गुमानी और गौर्दा का देशप्रेम
कुमाऊं अंचल में हिंदी की खड़ी बोली में साहित्य की परंपरा लम्बे समय तक मौखिक रही. कुमाऊं में हिंदी की खड़ी बोली में साहित्य का लिखित रूप प्रायः सन 1800 के बाद ही दिखाई देता है. (Nationalism... Read more
भारत के स्वाधीनता संग्राम में कुमाऊँ-गढ़वाल का बड़ा योगदान रहा था. कांग्रेस पार्टी की अगुवाई में इस पर्वतीय क्षेत्र के चप्पे-चप्पे में राष्ट्रभक्ति की लहर दौड़ गयी थी और यहाँ के अनेक नेता राष्ट... Read more
भारत के ‘आखिरी’ गांव माणा की तस्वीरें
हमारे साथी नरेंद्र सिंह परिहार ने गढ़वाल के चमोली जिले के माणा गांव की कुछ मनोहारी छवियाँ भेजी हैं (Last Village Uttarakhand Mana Photos) भगवती के शीतला स्वरूप को समर्पित पिथौरागढ़ का मां वरद... Read more
बिशनी देवी साह – स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान जेल जाने वाली उत्तराखंड की पहली महिला
अंग्रेजों की दासता से पीड़ित भारतीय जनता ने आखिरकार 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का झण्डा बुलन्द कर ही दिया. इस बगावत की चिंगारी धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गई. जिसका प्रभाव देश के सुदूर... Read more
आधुनिकता को अंग्रेजों के आगमन और उनकी भाषा के साथ आये ज्ञान-विज्ञान के साथ जोड़कर देखा जाता है. कुछ हद तक इस बात में सच्चाई हो सकती है, मगर जो नया समाज भारत में बना, उसके लिए सिर्फ यूरोपीय आ... Read more
मध्य हिमालय के भारत तिब्बत सीमा में स्थित मिलम ग्लेशियर से निकलने वाली गोरीगंगा की सुरम्य जोहार घाटी का प्राकृतिक सौन्दर्य जितना अलौकिक है, उतनी ही विशिष्ट रही है वहां की शौका संस्कृति और उस... Read more
चमोली का चांदपुर गढ़
रानीखेत-कर्णप्रयाग मार्ग पर आदिबद्री से थोड़ी सी दूरी पर सड़क से 200 मीटर की ऊंचाई पर एक दुर्ग के अवशेष हैं. चमोली जिले के चांदपुर क्षेत्र में स्थित इस दुर्ग से लगा एक विष्णु का मंदिर है. दुर्... Read more



























