उत्तराखंड में रजस्वला स्त्रियों का गोठ-प्रवास
मकानों के गोठ में हर महीने के चार-पांच दिनों तक मवेशियों के साथ-साथ खड़कुवा और हमारी मां और भाभियां भी रहती थीं. मिट्टी-गोबर से सनी हुई ये औरतें गोठ-प्रवास के पांचवे दिन मील भर की दूरी पर स्थ... Read more
युवाओं से जुड़े 10 ज्वलन्त मुद्दे जो किसी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में शामिल नहीं किये
भारत में आम चुनाव हैं. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने अपने-अपने घोषणा पत्र जारी कर दिए हैं. लेकिन दोनों ने युवाओं से जुड़े कुछ ज्वलन्त मुद्दे छोड़ दिए हैं. युवाओं की इन मांगों को सामने रखते हुए उ... Read more
भूमि का रक्षक भूमिया देवता
उत्तराखण्ड में भूमिया देवता के मंदिर प्रायः हर गाँव में हुआ करते हैं. भूमिया देवता को भूमि का रक्षक देवता माना जाता है, इसी वजह से इन्हें क्षेत्रपाल भी कहा जाता है. खेतों में बुवाई किया जाने... Read more
घोषणा पत्रों में चरम सुख
गैरीगुरु की पालिटिकल इकानोमी : अथ चुनाव प्रसंग-3 पिछली कड़ी- गुलदाढू से सावधान भोंकता कम काटता ज्यादा है शस्य श्यामला धरती में किसानों की मेहनत फल फूल रही हैं. गोठ-भकार-खेत खलिहान अन्न से भरे... Read more
तुम्हारी मां अपनी मां की अनचाही संतान है
4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम-दूसरी क़िस्त पिछली क़िस्त का लिंक: 4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम तुम्हारी मां अभी तक स्वेच्छा से मां नहीं बनना चाहती बेटू. लेकिन उसे मां बनना है, कुछ पारिवारिक व सा... Read more
देबी के बाज्यू की चिट्ठियां
कहो देबी, कथा कहो – 40 पिछली कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 39 वह दौर और वे दिन! कितना कुछ याद आता है. गांव से आने वाली बाज्यू की वे चिट्ठियां जो बड़े-बड़े अक्षरों में वे अपने हाथ से लिख कर भेजते थे... Read more
कत्यूरी व चन्द शासकों की कुल देवी चम्पावती
कुमाऊँ के पूर्वी क्षेत्र के जिले चम्पावत में पूजी जाने वाली देवी है, चम्पवाती देवी. वे चम्पावत के आम जन के साथ ही कत्यूरी व चन्द शासकों की कुलदेवी भी हैं. इनका पूजास्थल चन्द शासकों द्वारा स्... Read more
चम्पावत जिले से चाहर किमी की दूरी पर स्थित है ललुवापानी. यहां से एक कच्ची सड़क जाती है हिंगला देवी के मंदिर जो कि एक उपशक्तिपीठ है. ललुवापानी से हिंगला देवी मंदिर जाते हुए सबसे पहले मार्ग पर... Read more
सरकारी विभागों में पावती, सिर्फ पावती नहीं है
उस कक्ष में पांच कर्मचारी उपस्थित थे- तीन पुरुष और दो महिलायें. सभी कुछ देर पहले ही अपने-अपने स्थानों पर आकर बैठे थे. शासकीय भाषा में कहें तो मध्याह्न पूर्व का समय था. कक्ष में -ज़मीन पर, टेब... Read more
घनश्याम का कुत्ता
कुछ दिन पहले हमारे एक मित्र ने बताया, कि आज उन्होंने एक अजीब वाकया देखा; एक रिक्शे के नीचे कुत्ता था. उन्हें लगा, कि कुत्ता रिक्शे के नीचे फँसा है और घिसटता चला जा रहा है. इस आशंका के चलते,... Read more


























