तीन मोड़ : पहाड़ से एक कहानी
बैंगनी, भूरे और नीलम पहाड़ियों के बीच रूपा नदी ने एक सुरम्य घाटी बना दी थी. हरे-भरेधान के खेतों के मध्य एक छोटा सा सुंदर गांव, नाम था देवी सैंण. आधुनिकता तथा कृत्रिम वातावरण से दूर लगता. कलय... Read more
उत्तराखंड में इन दिनों चल रहा युवाओं का आन्दोलन देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं पर पिछले कई वर्षों से सवाल उठते आ रहे हैं. सवाल औ... Read more
ऐसा रहा पहला टनकपुर बर्ड फेस्टिवल
टनकपुर और आसपास का क्षेत्र नंधौर जंगल, शारदा नदी और प्रवासी पक्षियों की प्रचुरता के कारण प्राकृतिक संपदा से भरा हुआ है. इस अनूठे सौंदर्य का आनंद लेने के लिए दिल्ली, नैनीताल, रुद्रपुर, हल्द्व... Read more
नये बजट में पहाड़
पहाड़ को बजट से बड़ी उम्मीद बंध गईं हैं. इसे तत्पर और जिम्मेदार बजट की संज्ञा दी गयी है यह देश के हर भाग को कुछ न कुछ देगा. हर वर्ग को कुछ न कुछ बंटेगा. यह सकारात्मक होगा क्योंकि ये बताएगा क... Read more
शमशेर सिंह बिष्ट ठेठ पहाड़ी थे. उत्तराखंड के पहाड़ी ग्राम्य जीवन का एक खुरदुरा, ठोस और स्थिर व्यक्तित्व. जल, जंगल और ज़मीन को किसी नारे या मुहावरे की तरह नहीं बल्कि एक प्रखर सच्चाई की तरह जी... Read more
सासु बनाए ब्वारी खाए
पिछली कड़ी- राजा-पीलू की जोड़ी शादी के अगले दिन की सुबह हर नयी बहू के लिए कभी न भुलायी जाने वाली सुबह होती है थोड़ी सी घबराहट, झिझक और नये परिवार की परंपराओं, तौर-तरीकों को समझने की कोशिश के... Read more
संवरेगी कुमाऊं की सबसे बड़ी बाखली
अल्मोड़ा से हल्द्वानी की ओर निकलने पर एक जगह पड़ती है क्वारब. क्वारब में सुयाल नदी पर बना पुल नैनीताल और अल्मोड़ा जिले की सीमा अलग-अलग करता है. क्वारब से एक रास्ता सुयालबाड़ी, खैरना होता हुआ... Read more
पिछली कड़ी यहां पढ़ें- छिपलाकोट अंतर्यात्रा : कभी धूप खिले कभी छाँव मिले- लम्बी सी डगर न खले मनीराम पुनेठा जी की दुकान में शाम के समय अखबार बटोरने गया तो पूरे दस दिन के अखबार कायदे से बंडल में... Read more
उत्तराखंड की मानसखंड पर आधारित झांकी को गणतंत्र दिवस परेड की झांकियों में पहला स्थान मिला है. इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में उत्तराखण्ड की झांकी ने... Read more
राष्ट्रपति के सामने होने वाले बीटिंग रिट्रीट समारोह की औपचारिक शुरुआत हो चुकी थी. रायसीना हिल्स की इस शाम में ठंड खूब थी और आसमान में लगे घने काले बादल अब बारिश की बूंदें बरसाने लगे थे. तभी... Read more



























