ऐपण बनाकर लोक संस्कृति को जीवित किया
छोटी मुखानी में हुई ऐपण प्रतियोगिता पर्वतीय लोक संस्कृति ऐपण कला को संरक्षित व उसको बढ़ाने के उद्देश्य से छोटी मुखानी में ऐपण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ. विभिन्न वर्गों में आयोजित प्रतियोगिता... Read more
मौत हमारे आस-पास मंडरा रही थी. वह किसी को भी दबोच सकती थी. यहां आज उसी का राज था. हमारे शरीर लगातार हिमांक के पास थे और हमारे मन-मस्तिष्कों में भावनाओं का उबाल क्वथनांक से ऊपर पहुँच रहा था.... Read more
(1906 में छपी सी. डब्लू. मरफ़ी की किताब ‘अ गाइड टू नैनीताल एंड कुमाऊं’ में आज से कोई 120 बरस पहले के कुमाऊं-गढ़वाल के बारे में बहुत दिलचस्प विवरण पढ़ने को मिलते हैं. प्रस्तुत है इस किताब से... Read more
पिथौरागढ़ के कर्नल रजनीश जोशी ने हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान, दार्जिलिंग के प्राचार्य का कार्यभार संभाला
उत्तराखंड के सीमान्त जिले पिथौरागढ़ के छोटे से गाँव बुंगाछीना के कर्नल रजनीश जोशी ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए महज 44 साल की उम्र में विश्वविख्यात ‘हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान (एचएमआई), दार... Read more
(1906 में छपी सी. डब्लू. मरफ़ी की किताब ‘अ गाइड टू नैनीताल एंड कुमाऊं’ में आज से कोई 120 बरस पहले के कुमाऊं-गढ़वाल के बारे में बहुत दिलचस्प विवरण पढ़ने को मिलते हैं. प्रस्तुत है इस किताब से... Read more
बहुत कठिन है डगर पनघट की
पिछली कड़ी : साधो ! देखो ये जग बौराना इस बीच मेरे भी ट्रांसफर होते रहे जहाँ भेजा चला गया और फिर एम बी कॉलेज हल्द्वानी. भय ये भी था कि डिग्री प्राचार्य में आना है. भले ही अनुवांशिकता में बाबूग... Read more
आपने उत्तराखण्ड में बनी कितनी फिल्में देखी हैं या आप कुमाऊँ-गढ़वाल की कितनी फिल्मों के नाम जानते हैं. मेघा आ, सिपैजी, इकुलांस, गोपी भिना, केदार, और कितनी? हाल में आई संस्कार या फिर गढ़-कुमौं... Read more
“भोर के उजाले में मैंने देखा कि हमारी खाइयां कितनी जर्जर स्थिति में हैं. पिछली रात की स्मृति डरावनी थी तो सुबह का नजारा तो दिल दहलाने वाला ही था. खाइयों में दर्जनों लाशें पड़ीं थीं. हर जगह इ... Read more
साधो ! देखो ये जग बौराना
पिछली कड़ी : उसके इशारे मुझको यहां ले आये मोहन निवास में अपने कागजातों के ढेर से जूझते मेरे गुरु जैसे उन लहरों को चीर उस टापू की तलाश करने में लगे थे जहां इतिहास के पन्नों ने एक नई इबारत लिखे... Read more
कफ़न चोर: धर्मवीर भारती की लघुकथा
सकीना की बुख़ार से जलती हुई पलकों पर एक आंसू चू पड़ा. (Kafan Chor Hindi Story By Dharmveer Bharti) “अब्बा!” सकीना ने करीम की सूखी हथेलियों को स्नेह से दबाकर कहा, “रोते हो! छिह.” बूढ़े क... Read more


























