“उठो जागो लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत.” स्वामी विवेकानन्द के ये विचार अल्मोड़ा के लक्ष्य सेन पर एकदम फिट बैठते हैं, ऐसा लगता है जैसे स्वामी जी लक्ष्य से स्वयं ये वाक्य कह रहें हों... Read more
जुरमाना : प्रेमचंद की कहानी
ऐसा शायद ही कोई महीना जाता कि अलारक्खी के वेतन से कुछ जुरमाना न कट जाता. कभी-कभी तो उसे ६) के ५) ही मिलते, लेकिन वह सब कुछ सहकर भी सफाई के दारोग़ा मु० खैरात अली खाँ के चंगुल में कभी न आती. ख... Read more
कुमाऊं में ब्राह्मणों के प्रकार
कुमाऊं की जातिगत परम्परा के अंतर्गत ब्राह्मणों के भीतर भी वर्ग किये गये हैं. इस वर्गीकरण के आधार पर कुमाऊं में तीन तरह के ब्राह्मण देखने को मिलते हैं. इन तीनों ही ब्राह्मणों का आपस में विवाह... Read more
मां की ठोस यादों से भरा कुमाऊनी गीत “पलना”
अपने जीवन में स्त्री एक साथ कई किरदारों से होकर गुजरती है जिसमें मां का किरदार सबसे मयाला है. एक स्त्री अपने बच्चे को अपना सबकुछ दे देना चाहती है फिर कैसी भी परिस्थितियां हो. पहाड़ की स्त्री... Read more
चाय से जुड़े अफसाने, चाय दिवस के बहाने
चाय हमारे हिन्दुस्तानी समाज में कुछ इस तरह रच-बस चुकी है कि वह अब केवल राष्ट्रीय पेय ही नहीं रहा, बल्कि चाय के बहाने बड़े बड़े काम चुटकियों में हल करने का जरिया भी है. बाजार से लेकर दफ्तर तक... Read more
पुस्तक समीक्षा – भंवर: एक प्रेम कहानी
भंवर: एक प्रेम कहानी- अनिल रतूड़ी का हाल ही में प्रकाशित उपन्यास है. उपन्यास में लेखक ने लोक-जीवन से भरपूर जितने चित्र और चरित्र उकेरे हैं, कुदरत के चित्र उससे कहीं कमतर नहीं दिखते. लेखक को... Read more
पूरन दा और उनकी चलती-फिरती काफल की दुकान
गर्मियों के आने की आहट के साथ आ जाता है पहाड़ों का रसीला काफल. हर साल अपने रुप से हर किसी का मनमोह लेना वाला यह फल साल दर साल आम आदमी की जेब से दूर होता जा रहा है. कुछ साल पहले पांच रुपए में... Read more
कुमाऊनी संस्कृति के रंगों से गुलजार होता नैनीताल
पिछले एक वर्ष में नैनीताल का स्थानीय बाज़ार कुमाऊनी संस्कृति के रंगों से गुलजार होता नजर आ रहा है. बाज़ार की दुकानों की दीवारें हों या उनके शटर के रंग, सड़कों को बनावट हो या नवनिर्मित भवन सं... Read more
पहाड़ की स्मृति : यशपाल की कहानी
अब तो मण्डी में रेल, बिजली और मोटर सभी कुछ हो गया है पर एक ज़माना था, जब यह सब कुछ न था. हमीरपुर से रुवालसर के रास्ते लोग मण्डी जाया करते थे. उस समय व्यापार या तो खच्चरों द्वारा होता था या फ... Read more
फ़ोटोग्राफ़र : क़ुर्रतुल एन हैदर की कहानी
मौसमे-बहार के फलों से घिरा बेहद नज़रफ़रेब1 गेस्टहाउस हरे-भरे टीले की चोटी पर दूर से नज़र आ जाता है. टीले के ऐन नीचे पहाड़ी झील है. एक बल खाती सड़क झील के किनारे-किनारे गेस्टहाउस के फाटक तक प... Read more



























