Featured

घर वाली दीपावली और निबंध वाली दीपावली

हमारी शिक्षा की गोभी सबसे पहले हमारी स्कूली शिक्षा से खुदती है. स्कूल में पढाई 80 प्रतिशत व्याहारिक बातें गलत होती हैं. हमें कक्षा तीन से दीपावली पर निबंध पर इंक पैन घिसना सिखाया गया अंग्रेजी में यह पैन घिसाई नवीं से शुरू होती थी. कक्षा के साथ शब्दों की संख्या बढ़ती गयी या यूं कहिये नये शब्द जुड़ते गये. निबंध वाली दीपावली और हमारे घरों की दीवाली में उतना ही अंतर होता था जितना फुसकी मुर्गा छाप और हरयाले रस्सी बम में होता है.

शुरुआत हमारे निबंध की पहली पंक्ति से ही की जाये. दीपावली दीपों का त्यौहार है. हमारे घर में दीपावली दीपों से ज्यादा मोमबत्ती का त्यौहार हुआ करता था. जिस मोमबत्ती के गले हुये टुकड़े अगले दिन घरवाले बच्चों से जमीन से खुरचा – खुरचा कर निकलवाते थे. जाड़ों में यही हमारे परिवार का वैसलीन हुआ करता था. होंठ से पैरों की एड़ी तक की हिफ़ाजत इसी के हवाले थी.

जमाना बदला हमारी दीपावली बिजली की माला वाली हो गयी. भले ही भारत में कानूनन आप अठारह साल बाद वयस्क होते हों लेकिन हमारे परिवारों में अगर आपको बिजली की माला लगाना आ गया तो आप पर वयस्कता का ठप्पा लग जाता था. यही काम अगर किसी मौहल्ले में किसी लड़की ने कर दिया तो लड़की को बिजली की माला लगाने के लिये भारत रत्न योग्य समझा जाता था.

इस बिजली माला प्रकरण का एक नुकसान यह था कि अगर आपको माला लगानी आ गयी तो आप इंजीनियरिंग की परीक्षा के लिये स्वतः काबिल हो जाते थे. बिजली की माला घर में चमकती थी और इंजीनियरिंग का बिल्ला आपका आभा मंडल तैयार कर देता था. लेकिन हमारे निबंध की पहली लाइन अब भी वही थी दीपावली दीपों का त्यौहार है.

दीपावली के दीपों जैसी तमाम किताबी गप्पों के बीच एक गप्प लिखी जाती थी कि दीपावली में बच्चों को खूब मिठाईयां मिलती हैं. यह पंक्ति सच है लेकिन अधूरा सच है. दीपावली में बच्चों की कुटाई सबसे ज्यादा मिठाई के कारण होती है. भारतीय इतिहास में ऐसे बच्चे गिनती के मिल जायेंगे जिसने मिठाई के चक्कर में दीपावली में मार ना खायी हो. ऐसे बच्चों की संख्या ज्यादा मिलने की संभावना भी है जिन्होंने दीपावली की मिठाई की वजह से मिठाई से ज्यादा कुटाई ज्यादा खाई हो.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Girish Lohani

Recent Posts

हैप्पी बर्थडे कॉर्बेट साहब

जिम कॉर्बेट उन चुनिंदा विदेशी मूल के भारतीयों में से एक हैं जिन्होंने भारत में…

2 hours ago

28 साल के युवा से जब टिहरी रियासत डर गई

रात का वक्त था. जुलाई की बारिश पहाड़ों को भिगो रही थी, और भिलंगना नदी हमेशा…

4 hours ago

दुनिया में शांतिपूर्ण आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास

मानव इतिहास में सत्ता के विरुद्ध विरोध उतना ही पुराना है जितना संगठित शासन. प्रारंभिक…

1 day ago

गांधीजी ने दुनिया के सबसे बड़े अहिंसक आंदोलन का संचालन कैसे किया?

12 मार्च 1930 की सुबह साबरमती आश्रम के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्र थे.…

2 days ago

भारत में आँसू गैस के गोले सबसे पहले अंग्रेज़ लाए थे

आज भारत में किसी बड़े प्रदर्शन, छात्र आंदोलन या राजनीतिक रैली के दौरान पुलिस द्वारा आँसू…

2 days ago

कुमाऊं का सबसे बड़ा सामाजिक समूह “खस” रहा : आर. डी. सनवाल

पिछली कड़ी : सोशियल इकोनॉमी ऑफ हिमालय : हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक…

2 days ago