उत्तराखण्ड के कुमाऊं मंडल का प्रमुख पहाड़ी जिला है अल्मोड़ा. यह ऐतिहासिक शहर कभी कुमाऊं डिवीजन का मुख्यालय हुआ करता था. कहा जाता है कि इसका नाम अल्मोड़ा घास (रुमेक्स हेस्टाटा) के नाम पर पड़ा... Read more
उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम और बीसवीं शताब्दी के शुरुआती वर्षों में अल्मोड़ा में अंग्रेजों द्वारा स्थापित किये गए लन्दन मिशन के प्रभाव में आकर अच्छी खासी संख्या में लोगों ने ईसाई धर्म अपनाया... Read more
सिकंदर: बच्चों के लिए एक बेहतरीन फिल्म
हमारे देश में बच्चों का सिनेमा बनाने और उसे प्रचारित–प्रसारित करने के लिए बकायदा एक संस्था है जिसका नाम है ‘चिल्ड्रन फ़िल्म सोसाइटी.’ यह सोसाइटी पिछले कई वर्षों से न सिर्फ बच्चों के लिए सिनेम... Read more
सिनेमा: पांच मिनट में सत्रह देशों की दुनिया
एन वुड द्वारा 1984 में स्थापित टीवी कंपनी रैगडौल से सीख मिलती है कि एक अच्छा प्रोग्राम कैसे और कितनी मेहनत से बनाया जाता और फिर यह भी कि प्रोग्राम बनाने में रुपये पैसे के अलावा दिल भी लगाना... Read more
सिनेमा: पहले दिन के पहले शो का देशी रोमांच
आज से तीस साल पहले तक जब डिजिटल तकनीक का कोई अता-पता नहीं था हर शुक्रवार को फ़िल्म रिलीज़ होना एक बड़ी सांस्कृतिक कार्रवाई जैसा था. कई बार फ़िल्म के प्रचार के लिए साइकिल रिक्शे पर बड़े होर्डिंग ल... Read more
युवा फ़िल्मकार शेफाली भूषण पिछले दो दशकों से अपनी वेबसाइट ‘द बीट ऑफ़ इंडिया’ के जरिये दूर-दराज के लोक गायकों को मंच मुहैय्या करवाने का महत्वपूर्ण काम कर रही हैं. उनकी पहली हिंदी फीचर फ़िल्म ‘जु... Read more
ईरानी महिला फ़िल्मकार ‘मरजियेह मेश्किनि’ की पहली फ़िल्म ‘द डे व्हेन आई बीकेम वुमन’ तीन छोटी फ़िल्मों में से दूसरी फ़िल्म आहू भी ईरानी समाज की महिलाओं के गहरे दुःख और उससे... Read more
सिनेमा : कालजयी फ्रेंच फिल्म ‘रेड बैलून’ का जादू
फ़्रांस के फ़िल्मकार अलबर्ट लेमुरेस्सी द्वारा बच्चों के लिए बनायी फ़िल्म ‘रेड बैलून’ अपने निर्माण के साठ साल बीत जाने के बावजूद अब भी जहाँ कहीं भी दिखाई जाती है अपने दर्शकों का दिल जीत लेती है.... Read more
फ़िल्म आस्वाद किसे मानें
बीती 22 जून से 25 जून इंदौर की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था ‘सूत्रधार’ ने इंदौर के होटल अपना व्यू के सबरंग सभागार में फ़िल्म आस्वाद की कार्यशाला आयोजित की जिसमें आस-पास के इलाके और इंदौर से क... Read more
प्रेमचंद की याद
हिंदी भाषा के सबसे बड़े रचनाकार के रूप में आज भी प्रेमचंद की ही मान्यता है. हिंदी गद्य को आधुनिक रूप देकर उसे आम जन के बीच लोकप्रिय बनाने का काम उनका बहुत ख़ास है. प्रेमचंद ने न सिर्फ विविध वि... Read more
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