मध्यकालीन गढ़वाल राजनीति का चाणक्य भाग – 2
पिछली कड़ी कूटनीतिज्ञ पूरिया नैथानी की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण यात्रा 1680 में मुग़ल दरबार में रही. मुग़ल सम्राट औरंगजेब ने अपनी धार्मिक नीति के अंतर्गत 1665 ई. में हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया था.... Read more
रहस्यमयी झील रूपकुंड तक की पैदल यात्रा – अंतिम
(पिछली क़िस्त का लिंक – रहस्यमयी झील रूपकुंड तक की पैदल यात्रा – 6) लौटते हुए ज्यादा परेशानी नहीं हुई पर अब बर्फ पिघलने लगी है इसलिये रास्ते में फिसलन हो गयी है जिससे चलने में परे... Read more
आज का लोकतंत्र और कटरा बी आर्ज़ू
कटरा बी आर्ज़ू जब पहली बार मैंने पढ़ना शुरू किया था तो यह मुझे साधारण से मुहल्ले की कहानी लगी थी-जैसा हर मुहल्ला होता है. राही साहब की पाठकों से सीधे एक रिश्ता बना लेने और अपने पाठ के बारे में... Read more
फ़िल्म आस्वाद किसे मानें
बीती 22 जून से 25 जून इंदौर की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था ‘सूत्रधार’ ने इंदौर के होटल अपना व्यू के सबरंग सभागार में फ़िल्म आस्वाद की कार्यशाला आयोजित की जिसमें आस-पास के इलाके और इंदौर से क... Read more
अपने भीतर घिरते जाने की कविताः आलोक धन्वा के बारे में -शिवप्रसाद जोशी अगर हिंदी कविता में इधर सबसे बेचैन और तड़प भरी रूह के पास जाना हो तो वो आलोक धन्वा के पास है. अपने दौर के तूफ़ानी कवि के... Read more
ट्रेल पास अभियान भाग – 3
पिछली कड़ी दूसरे दिन प्रातः चाय के पश्चात् शाह जी थ्रीश कपूर और मैं पुनः खाती गांव गये. कुलियों के लिये राशन तथा आलू खरीदा गया. कपूर साहब विडिया फिल्म लेना चाहते थे. परन्तु बैट्री डाउन होने क... Read more
उत्तराखंड सरकार ने पांच महीने पहले खत्म हो चुके निकायों के कार्यकाल पर चुप्पी साध ली थी. फोकस लोकसभा चुनाव पर कर दिया था. हाई कोर्ट ने जब सख्ती से सरकार को निकाय चुनाव कराने के आदेश दिए, तो... Read more
नैनीताल की रामलीला
नैनीताल की रामलीला का इतिहास नैनीताल में मल्लीताल की रामलीला की शुरूआत सन 1918 में राम सेवक सभा की स्थापना के साथ ही शुरू हो गयी थी. शुरूआती दौर में यह रामलीला खुले मैदान में होती थी जिसे आल... Read more
मैदान में मौज करते नेता पहाड़ में मांगते हैं वोट
विषम भौगोलिक परिस्थिति वाला राज्य. आज भी जहां आवागमन के सीमित संसाधन हैं. इसमें भी अधिकांश कच्ची व टूटी सड़कें हैं. पेयजल की आधी-अधूरी व्यवस्था है. रोजगार का कोई जरिया नहीं है. सीढ़ीनुमा खेतों... Read more
पहाड़ और मेरा बचपन – 3
पिछली क़िस्त पहाड़ और मेरा बचपन – 2 मां आस-पास की ऐसी औरतों को जानती थी, जिन्होंने खुद भी गाय पाली हुई थीं. ये सभी महिलाएं आपस में मिलकर घास का कोई पहाड़ खरीद लेतीं और फिर मिलकर घास काटने जात... Read more





















